माँ की शायरी से मैंने लिखना सीखा - अज़रा नक़वी

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 13-MAR-2024 || अजमेर || बुधवार की शाम तालियों की गड़गड़ाहट से गुलज़ार हुई जब प्रभा खेतान फाउंडेशन एवं रेख़्ता फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम लफ़्ज़ में शिरक़त की लेखिका, शिक्षिका, शायरा और समाज सेविका अज़रा नक़वी ने। इस कार्यक्रम में उर्दू, अरबी और फ़ारसी को प्रोत्साहित किया जाता है, जिसे श्री सीमेंट के सीएसआर इनिशिएटिव के तहत सहयोग मिलता है। वीकेयर एवं अहसास वूमेन ऑफ अजमेर इसके सहयोगी है। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत उद्बोधन कर मुख्य अतिथि अज़रा नक़वी से बातचीत का सिलसिला अजमेर की अहसास वूमन डॉ. विनीता अशित जैन ने जारी रखा। बातचीत के दौरान नक़वी ने अपने लेखन एवं शायरी के सफ़र का ज़िक्र करते हुए कहा कि "माँ का शायरियों के प्रति रुझान देखकर शब्दों के प्रति मेरे प्रेम में बढ़ोतरी हुई।" बातचीत में नक़वी ने अपने जीवन के कई अन्य रोचक एवं दिलचस्प किस्सों से दर्शकों को बाँधे रखा। कार्यक्रम में नक़वी द्वारा लिखित ' उर्दू शब्दों का गुलदस्ता ' क़िताब भी साझा की गई। कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ.बृजेश माथुर ने नक़वी को मेमेंटो देकर सम्मानित किया, जिसके बाद सभी अतिथियों का डॉ. विनीता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान कार्यक्रम में डॉ. अंजू माथुर, राजेंद्र गुंजल, अनंत भटनागर, कालिंद नंदिनी शर्मा सहित शहर के कई साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

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