अभिनंदन तपस्या का होता है :- गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 11-OCT-2023 || अजमेर || संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने महावीर भवन, नवकार कॉलोनी में श्रीमती शिल्पा जी खटोड़ धर्मपत्नी श्री मनीष जी खटोड़ के मासखमण की विशिष्ट तपस्या के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में उपस्थित श्रदालुजनो को संबोधित करते हुए फरमाया कि श्रीमती शिल्पा जी का जो सम्मान किया जा रहा है यह सम्मान इनका नहीं, बल्कि इनके द्वारा की जा रही तपस्या का सम्मान है। व्यक्ति के लिए एक दिन का आहार छोड़ना भी बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि अपने शरीर के प्रति इतना गहरा लगाव होता है कि व्यक्ति इसे जरा भी कष्ट या परेशानी नहीं होने देना चाहता है। मगर छोटी उम्र में ही शिल्पा बहन ने उपवास से सीधा मासखमण करने का जो साहस दिखाया है वह हम सबके लिए अनुकरणीय है।15 की तपस्या हुई और बेटा आकर कहने लगा, मेरी मां को भूखा क्यों रखा जा रहा है, इनको किसकी सजा मिल रही है ।तब उसे समझाया कि यह सजा तुम्हारी मां को नहीं बल्कि उन अशुभ कर्मों को मिल रही है, जो अनादि काल से इस आत्मा के साथ लगे हुए हैं। और अशुभ कर्मों को तपस्या द्वारा आत्मा से अलग किया जा सकता है ।तब वह समझा। तपस्या के बारे में सुनना वह बोलना आसान है मगर तपस्या को जीवन में स्वीकार करना बड़ा ही कठिन काम है।एक दिन की तपस्या में भी बहुतों को दिन में तारे नजर आने लग जाते हैं। लगता है कि कब अगला दिन आए और कब पारणा करें ।अतः तपस्या बड़ी मुश्किल है। तप शब्द दो अक्षरों से मिल कर बना है। त का अर्थ है तत्काल और प का अर्थ है पवित्र करने वाला। जो तत्काल पवित्र करें वह तप है।आपने भी इस उग्र तपस्या को धारण करके अपनी आत्मा के पवित्रीकरण का अपूर्व प्रयास किया है। आपका यह तप भगवान के उस आदर्श को लेकर आगे बढ़े,जो दसवेकालिक सूत्र में बताया है की तपस्या इस लोक और पर लोक के सुख के लिए नहीं,यश कीर्ति सम्मान व प्रतिष्ठा को प्राप्त करने के लिए नहीं हो। बल्कि तपस्या तो एकांत कर्मों की निर्जरा के लिए ही होनी चाहिए। आपके शरीर की विशुद्धि के साथ-साथ आपके मन और विचारों की भी विशुद्धि बढ़े ,यह तप आपकी समाधि,कल्याण एवं मंगल का हेतु बने। इसी मंगल कामना और शुभकामना के साथ कि, इन्होंने 31 दिन की तपस्या की है तो आप भी 31 दिन के लिए कोई ना कोई प्रत्याखान अवश्य ग्रहण करें। मैंने इस तपस्या के दौरान इनके सासूजी व माताजी को देखा कि वह भी वर्षीतप जैसी तपस्या करने के बावजूद भी और पतिदेव और समस्त परिवार वालों ने भी तपस्वी बहन का निरंतर उत्साह बढ़ाने का कार्य किया एवं उन महिलाओं को भी धन्यवाद जिन्होंने रोजाना जाकर ज्ञान ध्यान आदि सुनाने में सहयोग दिया। तो हम सब का भी यह प्रयास रहे कि इनसे प्रेरणा लेकर यथासंभव तप मार्ग में आगे बढ़ने का प्रयास करें। अगर ऐसा प्रयास रहा तो सर्वत्र आनंद ही आनंद होगा। तपस्वी बहिन का अभिनंदन हेतु प्राज्ञ परिवार की ओर से अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। तपस्या का सम्मान तपस्या से पुरुष व महिला वर्ग से अच्छी संख्या में तपस्या ग्रहण करके किया गया। वक्ताओं ने अपने भावों के द्वारा तप की अनुमोदना करने का प्रयास किया। धर्म सभा को पूज्य श्री विरागदर्शन जी महारासा ने भी संबोधित किया। धर्म सभा का संचालन बलवीर पीपाड़ा एवं हंसराज नाबेड़ा ने किया।

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