शांति और एकता के अग्रदूत थे गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महारासा :- गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 18-SEP-2023 || अजमेर || संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया कि गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महारासा कि आज जन्म जयंती का पावन अवसर है। वे हम सब के आधार है ।मैंने गुरुदेव को देखा तो नहीं मगर उनके बारे में पढा और सुना जरूर है। गुरुदेव श्री जी ने बालक के रूप में जन्म भले ही लिया हो मगर अपने कार्यों से बड़प्पन एवं महानता को प्राप्त किया। गुरुदेव श्री जी की वाणी का, संयम साधना का प्रभाव था कि जिन झगड़ों को निपटाने में वकील भी फेल हो जाते उन्हें गुरुदेव समझाते और झगडे मिट जाते। तीर्थंकर भगवान का तो अतिशय ही होता है कि वह जहां पर भी जाते हैं वहां चार कोष कोई भी उपद्रव नहीं होता ।गुरुदेव श्री जी का जीवन देखकर भी लगता है की झगड़ों को मिटाना भी उनका जैसे जन्मजात अतिशय ही था। चाहे राताकोट का झगड़ा हो या नांदला आदि स्थानों के झगड़ा। गुरुदेव ने उन सभी को शांति के साथ निपटाने का कार्य किया। श्रावकों के साथ-साथ गुरुदेव ने साधु संतों की एकता के लिए भी प्रयास किया ।पहले छोटे-छोटे साधु सम्मेलनों का आयोजन करवाया। पाली सम्मेलन में गुरुदेव श्री जी को प्रवर्तक की पदवी दी गई ।बृहद साधु सम्मेलन का आयोजन अजमेर में करवाने के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के लिए नो श्रावक रतनो को तैयार किया। आचार्य श्री आत्माराम जी महारासा के पश्चात आचार्य श्री आनंद ऋषि जी महारासा के आचार्य के नाम की घोषणा एवं आचार्य पद की चादर महोत्सव का कार्यक्रम भी गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महाराज साहब द्वारा अजमेर मे करवाया गया। श्रमण संघ का निर्माण होने के बाद जब इसमें शिथिलता आई , तो गुरुदेव ने पहले समझाने का प्रयास किया, मगर जब लगा कि अब समझाने से कोई फायदा नहीं है, तो संगठन की खातिर संयम साधना से समझौता करना उचित नहीं समझा। तब संयम की सुरक्षा के लिए अपने ही बनाए श्रमण संघ का भी त्याग कर दिया। इसी के साथ गुरुदेव ने समूचे भारतवर्ष में स्वाध्याय की एक अनोखी अलख जगाने का कार्य किया। दीर्घदर्शी गुरुदेव स्वाध्याय संघ के प्रथम संस्थापक थे ।आज हम उनके जन्म जयंती के उपलक्ष में उनके जीवन से कोई ना कोई शिक्षा अवश्य ग्रहण करने का प्रयास करें। आज की धर्म सभा में चेन्नई किशनगढ़ पुष्कर आदि श्री संघों से श्रद्धालु जन पधारे ।भक्तों ने गुरु गुणगान के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त की। आज का दिवस संवर साधना के साथ मनाया जाएगा। कल प्रातः 8:30 बजे सजोडे जाप का कार्यक्रम रखा गया है। धर्म सभा को पूज्य श्री सौम्यदर्शन जी, पूज्य श्री विरागदर्शन जी महारासा ने भी संबोधित किया। धर्म सभा का संचालन बलवीर पीपाड़ा एवं हंसराज नाबेड़ा ने किया।

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