संसार में रहते हुए अनासक्त भाव से जीवन जीने वाला का ही कल्याण संभव ---- गुरुदेव श्री सौम्यदर्शन मुनि

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 13-SEP-2023 || अजमेर || गुरुदेव श्री सौम्यदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया की 24 तीर्थंकर भगवान का नाम स्मरण आत्मा को अपार शक्ति प्रदान करने वाला है । छटे तीर्थंकर भगवान पदमप्रभ स्वामी जी भगवान जब माता के गर्भ में पधारे उस समय उनकी माता को कमल की सैया पर सोने का दोहद उत्पन्न हुआ ।इसलिए जन्म के पश्चात इनका नाम पदमप्रभ गुण निष्पन्न नाम रखा गया। पदम कमल को भी कहा जाता है। और कमल में बहुत विशेषताएं होती है हम कमल की दो मुख्य विशेषताओं को देखें। एक तो कमल पैदा तो कीचड़ में होता है मगर वह कीचड़ से निर्लिप्त रहता है । उसी प्रकार ग्रहस्थ जीवन जीने वाला व्यक्ति भी संसार में रहता हुआ भी अनासक्त भाव से रहने का प्रयास करें ।क्योंकि संसार में रहना बुरा नहीं है ,मगर संसार को अपने अंदर रखना बुरा है ।नाव पानी में रहे तो दिक्कत नहीं है ,मगर नाव के भीतर पानी आ जाए तो दिक्कत ही दिक्कत है ।दो प्रकार के नारियल आपके पास है ।एक सूखा नारियल दूसरा गीला नारियल। दोनों में से आपको गोले को बाहर निकलना हो तो कौन से नारियल से गोला आसानी से बाहर निकलेगा? उत्तर है सूखे नारियल से ।ठीक उसी प्रकार जो व्यक्ति संसार के राग रंग में, काम भोगों में पद पैसा प्रतिष्ठा की आसक्ति में लगा रहता है ।संसार के गहरे आकर्षण से चिपका हुआ रहता है। उसका संसार से मुक्त हो पाना मुश्किल रहता है। जबकि जो व्यक्ति सूखे नारियल के समान ,कमल के फूल के समान, संसार से संसार की आसक्ति से निर्लिप्त रहता है ,उसका संसार सागर से पार हो जाना आसान रहता है। इसी के साथ कमल की दूसरी विशेषता यह और है कि इसकी नाल पानी में रहकर भी गलती नहीं है, सड़ती नहीं है ।क्योंकि इस पर श्लेष्म की एक झिल्ली का आवरण चढ़ा रहता है। जो इसकी रक्षा करता है। इस प्रकार प्रभु का नाम स्मरण ,प्रभु की भक्ति भी एक आवरण के समान है जो व्यक्ति की विभिन्न बाधाओं, पीड़ाओं और कष्ट से रक्षा करने में सहायक है ।अतः पदमप्रभ भगवान के पदम नाम की विशेषताओं को हम अपने जीवन में अपना पाए ,तो हमारा यह जिनवाणी को सुनना सार्थक हो सकेगा। प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री पन्नालाल जी महारासा की जन्म जयंती कार्यक्रम में आज टिफिन एकासन कार्यक्रम और कल के दिवस सामूहिक निवि दिवस के रूप में मनाने की प्रेरणा की गई।महिला शिविर का आज तृतीय दिवस है। धर्म सभा को पूज्य श्री विरागदर्शन जी महारासा ने भी संबोधित किया । धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेड़ा ने किया।

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