पति एवम पत्नी के रिस्तो में सामंजस्य बहुत जरूरी -- सौम्य दर्शन मुनि जी

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 09-AUG-2023 || अजमेर || पूज्य गुरुदेव श्री सौम्यदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया कि रिश्तो की कड़ी में एक महत्वपूर्ण संबंध है पति और पत्नी का। गाड़ी के चलने मे जिस प्रकार दोनों पहियों का योगदान रहता है ,उसी प्रकार गृहस्थी जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए पति और पत्नी रूपी दोनों गाडियों का सामंजस्य बहुत आवश्यक होता है ।दोनों के बीच अगर अच्छा सामंजस्य है तो अच्छे से जीवन जिया जा सकता है ।लेकिन सामंजस्य नहीं होगा तो केवल ग्रहस्थ जीवन के भार को ढोने के समान ही कहा जा सकता है । पुराने जमाने के रिश्ते भले ही लड़के और लड़की को आपस में जाने बिना भी होते तो भी निभ जाते या निभा लिए जाते। मगर आज आपस में इतना जान पहचान आदि करने के बाद भी रिश्ते नहीं निभ पाते, कारण है कि आज का व्यक्ति सौंदर्य, शिक्षा ,साधन आदि को तो देखता है मगर संस्कार, समय और समझ को नहीं देखता है । पति और पत्नी के संबंधों को बिगड़ने में एक कारण है आपस में ट्रस्ट का अभाव यानी विश्वास की कमी जब पति-पत्नी का एक दूसरे के प्रति विश्वास नहीं रह पाता आपस में शंका की खाई आ जाती है तब यह रिश्ता बिगड़ते देर नहीं लगती है । पति और पत्नी के रिश्ते के बिगड़ने का दूसरा कारण है टाइम की कमी, यानी समय का अभाव ।यह आज के जमाने की सबसे बड़ी समस्या है ज्यादातर बहिनों की यह शिकायत रहती है कि उनके पति के पास उनके लिए समय नहीं है, और वह अपना ज्यादातर समय मोबाइल पर बिताना पसंद करते हैं । रिश्ते में टकराव का तीसरा कारण आपस में टॉकिंग का अभाव ,जब रिश्तो में एक दूसरे को समय नहीं दिया जाएगा ,तो आपस में बातचीत नहीं हो पाएगी ,जिससे एक दूसरे की भावनाओं संवेदनाओ और सुख-दुख की बातों का आदान-प्रदान नहीं हो पाएगा। और आपसी दूरियां बढ़ने लग जाएगी ।जब तक आपस में टचिंग यानी संपर्क बराबर नहीं रह पाएगा दूरियों को बढ़ाते रहेंगे ,तब तक कोई समाधान नहीं निकल पाएगा ।इसलिए अगर आप चाहते हैं कि पति और पत्नी के रिश्ते में प्रेम और प्यार बना रहे तो इसके लिए एक दूसरे पर विश्वास करते हुए आपसी सुख दुख मे, उतार-चढ़ाव में ,आपसी सहयोग और सामंजस्य को रखते हुए जीवन जीने का प्रयास करेंगे तो निश्चित रूप से आपका गृहस्थ जीवन सुखद हो सकेगा। धर्म सभा में छोटे बच्चे को धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने पर पोषण शुरू पुरस्कार प्रदान किए गए । धर्म सभा को पूज्य श्री विरागदर्शन जी महारासा ने भी संबोधित किया। धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेड़ा ने किया ।

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