जल ही जीवन है के साथ जल खुद भी जीव है, दुरुपयोग से बचे -- प्रियदर्शन मुनि

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 10-AUG-2023 || अजमेर || संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने नवकार कॉलोनी स्थित महावीर भवन में प्रवचन देते हुए फरमाया कि "जल ही जीवन है" यह बात आपने बहुत बार सुनी है। मगर जल खुद भी जीव है। यह बात हमें स्वीकार करनी है। जैन दर्शन जल में भी जीवन को स्वीकार करता है। अत: जल के जीवो की रक्षा करना हमारा दायित्व है ।जल की बहुत कीमत है। इसकी कीमत का एहसास व्यक्ति को तब होता है ,जब वह किसी गहरे जंगल में फस गया हो और प्यास के मारे कंठ सूख रहे हो, ऐसी स्थिति में कोई राहगीर वहां से गुजरे और वह एक गिलास जल के बदले आपके गले की सोने की चैन मांगे ,तो भी आप अपने प्राण बचाने के लिए वह सोने की चेन देना स्वीकार कर लेंगे ।जिस वस्तु की कीमत आप जानते हैं ,आप उसे ऐसे ही नहीं रख देते, उसे सुरक्षित रखते हैं। पानी पर अगर आज ज्यादा टैक्स लगा दिया जाए तो फिर क्या आप उसका दुरुपयोग करेंगे? नहीं। लगभग आज दुनिया में जितना पानी है, उसका मात्र 1% ही पीने का पानी है ।आज आप फालतू पानी वेस्ट करके उन सभी पानी के जीवो का भी अपमान कर रहे हैं, जो आपकी प्यास बुझाने के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दे रहे हैं। जाकर देखें अफ्रीका और अरब के देशो की हालात,की पीने को पर्याप्त मात्रा में पानी भी नहीं मिलता ।मारवाड़ की तरफ नलकूपों में 800 _800 फीट खोदने के बाद भी पानी नहीं निकलता ।सोचो अगर की ,ऐसी जगह जन्म लेने का मौका मिला तो क्या होता। जहां पर स्नान करने का पानी भी उपलब्ध ना हो तो फिर तो बिना स्नान के भी रहना पड़ता । आजकल स्विमिंग पूल ,बांध ,वाटर पार्क आदि में व्यक्ति स्नान करते हैं ।जहां पर वहां का चार्ज लगता है। मगर आप केवल मात्र अपने शौक को पूरा करने के लिए पैसा भी वेस्ट करते हैं ,और अनेक जीवो की हिंसा के निमित्त भी बनते हैं । बहुत से ऐसे सुज्ञ श्रावक लोग हैं जो गृहस्थी में रहते हुए भी बहुत कम पानी में अपना जीवन चलाते हैं। दया और अनुकंपा तो सम्यक्थि जीवो का लक्षण है ।अतः अपकाय के जीवो की रक्षा के लिए जल के अनावश्यक दुरुपयोग से बचने का प्रयास करें ।अगर ऐसा प्रयास और पुरुषार्थ रहा तो यत्र तत्र सर्वत्र आनंद ही आनंद होगा। धर्म सभा को गुरुदेव श्री जी द्वारा श्रद्धालु जनों को जल के अनावश्यक दुरुपयोग नहीं करने के संकल्प करवाए गए। धर्म सभा को पूज्य श्री सौम्यदर्शन मुनि जी महारासा ने भी संबोधित किया। धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेडा ने किया।

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