आत्मा को मलिनता से बचाए -- प्रियदर्शन मुनि

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 07-JULY-2023 || अजमेर || संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन जी महारासा ने फरमाया कि आत्मा का स्वभाव क्या है आत्मा स्वभाव में मलिन है या पवित्र है ?आत्मा स्वभाव में पवित्र है तो फिर आत्मा मलिन क्यों हो जाती है ,इसको इस प्रकार समझे धूल आदि के कणों के प्रवेश करने से मकान गंदा हो जाता है ,गंदे हाथ और पैरों द्वारा मकान में प्रवेश करने पर मकान गंदा हो जाता है साफ दीवार या साफ पेपर लकीरे खींचे जाने पर गंदा हो जाता है. उसी प्रकार आत्मा भी पाप क्रियायो के द्वारा मैली होती है !आपके मकान दीवार या पेपर को तो दूसरे भी गंदा कर सकते हैं,मगर आपकी आत्मा को गंदा करने वाले दूसरे नही है ,व्यक्ति स्वयं ही इसका जिम्मेवार है।आप पूरा ख्याल रखते हैं कि मेरे कपड़े,मकान,शरीर आदि गंदा नही होना चाहिए तो आत्मा भी गंदी नही होनी चाहिए।इसका भी ख्याल आया कि नही.आत्मा पर भी दाग लगता है जब मन,वचन और काया की अशुभ प्रवृत्ति होती है।आप विचार करे कि ऐसा कोई दिन नही आया होगा जिस दिन आपने मन वचन और काया से कोई पाप नहीं किया हो। भगवान की वाणी फरमाती है कंठ का छेदन करने वाला भी उतना नुकसान नहीं करता ,जितना नुकसान आत्मा को गलत मार्ग पर ले जाने वाला व्यक्ति करता है।और वो गलत मार्ग है पाप का मार्ग।पाप ही है जो व्यक्ति को दुर्गति में भटकाता है,पाप ही है जो जन्म मरण की परंपरा को बढ़ाता है,पाप ही है जो हमारी शांति और समाधि को भंग करता है। अत: पाप कर्म जिसको करने से पहले, करते समय,और करने के बाद व्यक्ति को डरना पड़े,भयभीत होना पड़े ऐसा कार्य नहीं करने का प्रयास करना चाहिए। धर्म सभा को विराग दर्शन मुनि जी महरासा ने भी संबोधित किया। धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेडा ने किया

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