पुण्य साता, एवम पाप असाता का कारण -- प्रियदर्शन मुनि

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 30-JULY-2023 || अजमेर || संघनायक गुरुदेव श्री प्रियदर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया कि आपके यहां अतिथि आते हैं तो आप कौन से अतिथि का आदर सत्कार करते हैं?जो आपके जान पहचान के हो, मिलने वाले हो और जो आपके हितेषी हो। आप आपके विरोधियों का या आपका बुरा चाहने वालों का आदर नहीं करते । इसी प्रकार पुण्य आपका हित चाहने वाला है और पाप आपका बुरा चाहता है तो दोनों में से आप किसको आदर देना पसंद करेंगे ,यह व्यक्ति के स्वयं के चिंतन का विषय है। दश्वेकालिक सूत्र में कहा गया है कि व्यक्ति सुनकर अपने कल्याण और अकल्याण दोनों मार्गों को जाने और जो श्रेयस्कर मार्ग हो उस मार्ग पर चलने का प्रयास करें। पाप का मार्ग एक अकल्याण का मार्ग है अतः पहले पाप मै रसनाइंद्रिय बल प्राण की हिंसा से बचने का चर्चा चल रही है कि किसी को बांसी पुराना या सड़ा हुआ खाना खिलाना भी एक प्रकार से हिंसा का ही रूप है । इसी के साथ किसी के आहार पानी आदि में बाधा पहुंचाना या उनका आहर पानी बंद कर देना यह भी एक प्रकार की हिंसा और कर्म बंध का कारण है और कर्म बंध के परिणाम को तो तीर्थंकर भगवान को भी भोगना पड़ता है ।भगवान ऋषभदेव के कहने पर लोगों ने बेलों के मुख पर छीका बांधे,मगर समय पर खोला नहीं ।लगभग 12 घड़ी तक छीका बंधा रहा,तो परिणाम आया कि लगभग 12 माह तक भगवान को आहार पानी में अंतराय पड़ी। संत किसी के घर में आहार और पानी के लिए गए ,उस समय कोई मां अपने बच्चे को दूध पिला रही हो और वह उसे छोड़कर आहार पानी देना चाहे तो वह आहार पानी संत के लिए ग्रहण करने योग्य नहीं होने के कारण संत उसे लेने से मना कर देते हैं। कारण है कि उसमें बालक को अंतराय पड़ती है । किसी को आहार करते समय कोई काम करा कर उसकी आहार पानी में बाधा पहुंचाना ,बच्चों को टॉफी आदि के लिए और कुत्तों को रोटी आदि के लिए तरसाना यह सब भी हिंसा के ही रूप है ।अतः पूरा पूरा प्रयास रहे कि मेरे द्वारा किसी के रसनाइंद्रियों को बाधा नहीं पहुंचे। अगर ऐसा प्रयास और पुरुषार्थ रहा तो यत्र तत्र सर्वत्र आनंद ही आनंद होगा । धर्म सभा को पूज्य श्री विराग दर्शन जी महारासा ने संबोधित किया । धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेडा ने किया।

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