उत्तम श्रेणी का मानव ही श्रेष्ठ मानव -- सौम्य दर्शन

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 16-JULY-2023 || अजमेर || गुरुदेव श्री सौम्य दर्शन मुनि जी महारासा ने फरमाया कि जीवन में बहुत तरह के मनुष्य होते हैं ।कुछ उत्तम श्रेणी के होते हैं जो दूसरों को सुखी करके खुशी का अनुभव करते हैं ।जिनका जीवन ही इस प्रकार का होता है कि वो दूसरों की तकलीफ या पीड़ा को नहीं देख सकते हैं दूसरों की पीड़ा देखकर वो पीड़ित हो जाते हैं ।दूसरों को दुखी देखकर वो दुखी हो जाते हैं,उनका अंतकरण करुणा और दया से भर जाता है और वो कैसे भी करके उस दुखी व्यक्ति के दुखों को दूर करने का प्रयास करते हैं चाहे उसके लिए उन्हें कितना ही कष्ट क्यों न उठाना पड़े,यहां तक की अपने प्राणों की कुर्बानी देकर भी सामने वाले की पीड़ा यदि मिटती हो ,तो अपने प्राणों का भी हंसते हंसते न्योछावर करने को तत्पर रहते हैं। ऐसे व्यक्ति ही सही मायने में उत्तम श्रेणी के व्यक्ति कहे जा सकते हैं । दूसरी श्रेणी मध्यम श्रेणी के व्यक्तियों की है यह दूसरों को सुखी देखकर खुशी का अनुभव करते हैं ,यानी इन्होंने किसी को सुखी भी नहीं किया मगर यदि कोई सुखी है तो उसे देख मन में प्रसन्न होते हैं कि अच्छा हुआ इसका दुख या पीड़ा मिट गई ।यानी दूसरों की तकलीफ दूर होने की स्थिति में आनंद का अनुभव करना । तीसरी श्रेणी अधम व्यक्तियों की होती है और दूसरों को दुखी देखकर प्रसन्नता का अनुभव करते हैं यानी आपका किसी से वैर चल रहा हो और जब उसको कोई परेशानी या दुःख आ जाए तो आपके मन में क्या विचार आते हैं कि" भगवान के घर में देर है मगर अंधेर नहीं" इसने मेरे साथ गलत किया था तो इसको देर सवेर गलती की सजा मिल ही गई ,यह जो भावना है यह सामने वाले को दुखी देखकर खुश होने की भावना ही तो है , ऐसी भावना वाला व्यक्ति अधम व्यक्तियों की श्रेणी में आता है । और चौथी श्रेणी में अधमाअधम व्यक्ति आते हैं जो दूसरों को दुखी करके खुशी का अनुभव करते हैं इन्हें दूसरों को दुखी करने में आनंद आता है उनकी योजना दिन-रात ऐसी ही रहती है कैसे भी करके मुझे सामने वाले को परेशान करना है वह किसी भी प्रकार से सुखी नहीं होना चाहिए बदले की भावना रखने वाला व्यक्ति ईर्ष्या और द्वेष की तीव्र गांठों को रखने वाला व्यक्ति अधमाअधम व्यक्ति कहलाता है ।चारों प्रकार की श्रेणियों को समझकर विचार करें मेरा लक्ष्य तो उत्तम व्यक्ति बनने का ही होना चाहिए नही तो कम से कम मध्यम श्रेणी में तो मेरा नंबर ही आ जाए ।मगर अधम और अधमाअधम श्रेणी में मेरा नंबर नहीं आए। ऐसा हमारा प्रयास और पुरुषार्थ रहा तो सर्वत्र आनंद और मंगल की स्थितिया बन सकेगी आज की सभा में नन्ही बालिका काशवी खेराड़ा ने 24 तीर्थंकरो के नाम और चिन्ह को कविता के रूप में सुनाया । रविवार का धार्मिक संस्कार शिविर का आयोजन बालक व बालिकाओं के लिए 2:00 से 3:30 बजे का रखा ,जिसमें लगभग 110 बालक बालिकाओं ने भाग लिया ,आज के लाभार्थी श्री राजकुमार,आयुष, अमन धम्मानी परिवार रहे । धर्म सभा का संचालन हंसराज नाबेड़ा ने किया

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