किताब खरीदने के लिए नहीं थे पैसे इसलिए अखबार से की तैयारी, पिता के सपने को पूरा किया

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 20-JULY-2021 || केकड़ी || बिना संघर्ष के जीवन में सफलता नहीं मिलती। आज हम एक ऐसे आईएएस ऑफिसर की बात करेंगे, जिसने गरीबी से लड़कर जीवन में सफलता प्राप्त की है। वह गरीब युवाओं के लिए एक उदाहरण हैं कि गरीबी हमें सफल होने से नहीं रोक सकती। कर्नाटक के कोडागु ज़िले में डीप्टी कमिश्रर के पद पर तैनात एनीस कनमनी जॉय अपने कार्य से अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। कोरोना काल में अपने राज्य में सुरक्षा के लिए एनीस ने कड़ी मेहनत की और लोगों को जागरूक भी किया। उनके मेहनत के वजह से ही कोडागु जिले में 28 दिन तक कोई भी कोविड के नए केस नहीं आए। एनीस कनमनी जॉय के पिता एक किसान हैं, जिससे उनकी परिवार की आर्थिक इस्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। अक्सर एनीस के पास किताब खरीदने के भी पैसे नहीं होते थे परंतु उन्होंने हार नहीं माना और ना ही गरीबी के सामने घुटने टेके। एनीस पहली ऐसी प्रोफेशनल नर्स हैं, जो आगे चलकर यूपीएससी यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बनी। साल 2012 में एनीस 65 वीं रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस बनी। वह त्रिवेंद्रम मेडिकल कॉलेज नर्सिंग में बीएससी की डिग्री प्राप्त कर चुकी हैं। एनीस कनमनी जॉय शुरु से ही पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी की परीक्षा देने के बाद नर्सिंग में ग्रेजुएशन किया। एनीस कनमनी जॉय के पिता अपनी बेटी को आईएएस ऑफिसर बनता देखना चाहते थे। एनीस यूपीएससी की परीक्षा में आपशनल विषय में मलयालम लिटरेचर और मनोविज्ञान का चुनाव किया। इस दौरान उनकी सबसे बड़ी समस्या उनके परिवार की आर्थिक स्थिति थी। हालत इतनी खराब थी कि उनके पास किताब खरीदने के भी पैसे नहीं थे। ऐसे में एनीस बिना कोचिंग किए केवल न्यूज़ पेपर से तैयारी करने का फैसला किया और तैयारीयों में जुट गईं। अपने पहले ही प्रयास में एनीस साल 2010 में 580 रैंक के साथ सफल हुई परंतु इसे उनके पिता का सपना पूरा नहीं हो पाया इसलिए एनीस दुबारा तैयारीयों में जुट गई। इस बार वह 65वीं रैंक के साथ सफल हुई और अपने पिता का सपना पुरा किया। एनीस कनमनी जॉय बताती हैं कि जब उनका परिणाम आया उस समय वह ट्रेन में सफर कर रही थी, अपनी सफलता सुन एनीस अपनी आंसू नहीं रोक पाई। साभार-खेती ट्रेंड

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