अखिल भारतीय बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति जी एस टी के नये प्रावधान व्यापार एवं व्यापारी के लिए घातक- शैलेन्द्र अग्रवाल*
||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 26-FEB-2021
|| अजमेर || रिपोर्ट हीरालाल नील -----------------------------------
भारत सरकार द्वारा एक तरफ तो देश में मध्यम व खुदरा व्यापार को बढ़ावा देने की बात की जाती है वहीं दूसरी और इस वर्ष के बजट प्रस्तावों में केन्द्र सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जिस प्रकार से जीएसटी के कठोर प्रावधान लागू किये गए हैं उससे ऐसा लगता है कि केन्द्र सरकार के इन प्रस्तावों से कि व्यापारियों को अब व्यापार करना भी जी का जंजाल हो जायेगा।
अखिल भारतीय बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव व अजमेर संभाग के प्रभारी पूर्व पार्षद शैलेन्द्र अग्रवाल ने एक बयान जारी कर कहा कि जीएसटी के नये प्रावधान व्यापारियों के लिए इतने कड़े और कठोर हैं कि इन प्रावधानों के चलते ना तो व्यापार चल पायेगा और ना ही व्यापारी खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगे। चार साल में जीएसटी में 937 से अधिक बार संशोधन होने के बाद गिएसतिब का बुनियादी ढांचा ही बदल गया है। जीएसटी को टैक्स सिस्टम सुधारने और सरल करने के उद्देश्य से लागू किया था लेकिन आज की तारीख में ये इतना पेचीदा हो गया है कि आए दिन इसमें बदलाव करने पड़ते हैं इसकी वजह से बार बार जीएसटी डर बदल रही है और कारोबारियों की दिक्कत बढ़ रही है।
शैलेन्द्र अग्रवाल ने बयान जारी कर कहा कि आयकर की धारा 281 बी और जीएसटी की धारा 83 में प्रस्तावित किया गया है कि कर अपवंचना के मामले मे कर अधिकारी एक साल तक कम्पनी और फर्म मालिक के बैंक खातों के अलावा पार्टनर, कम्पनी सेक्रेटरी, मैनेजर, सी ए, एडवोकेट और उससे जुड़े ऑडिटर, सलाहकार आदि के बैंक खाते व सम्पत्ति की प्रोविजनल रूप से जाँच कर सकते हैं। क्या यह न्याय संगत है? गलतियाँ होना स्वाभाविक है लेकिन इसकी इतनी बड़ी सजा देना जायज नही है। नये प्रस्तावों में आयकर के केस खोलने की समय को सीमा 6 साल की जगह 3 साल करना। वहीं कर अधिकारी छोटी सी सूचना पर केस खोल सकेंगे इससे विवाद बढ़ेंगे तथा दस्तावेजों पर आधारित रहना पड़ेगा। अग्रवाल ने बताया कि नये प्रस्तावों में व्यापारी अपने कर्मचारी का पीएफ कराने में कुछ देरी कर दे तो पूर्व में उसे खर्च में छूट के स्थान पर व्यापारी कि आय मान लिया जायेगा। जीएसटी आर 1 और 3 बी में अंतर होने पर अधिकारी फर्म का लाइसेंस भी रद्द कर सकता है मतलब गलती की कोई गुंजाइश नही रहना चाहिए। जीएसटी रिटर्न रिवाइज़ नही कर सकते अगर गलती हो गयी तो व्यापारी पर आफत आ जायेगी। इस प्रकार से केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा लगातार व्यापारियों को राहत देने की बात का प्रचार किया जा रहा है वह पूरी तरह बेबुनियाद साबित हुआ है और अब व्यापारियों को जीएसटी के कठोर नियमों के चलते कारोबार करने को बाध्य होना पड़ेगा जो पूरी तरह असंभव है। ऐसे हालात में व्यापारी अपने व्यापार को बंद करने पर मजबूर हो जाएंगे।
अग्रवाल ने मांग की है कि केन्द्र सरकार को इन कड़े प्रावधानों पर एक बार पुनः विचार कर व्यापार हित में कारोबार के सरलीकरण के प्रयास करने चाहिये।
शैलेन्द्र अग्रवाल, पूर्व पार्षद
राष्ट्रीय महासचिव एवं अजमेर संभाग प्रभारी
अखिल भारतीय बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति
9414280962, 7891884488
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