#AJMER-NEWS साहित्यकार व कवित्री सुमन शर्मा द्वारा पेश की गई कुछ कविताएं 

[23:22, 15/06/2020] Payam-E- Rajasthan News: ||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 15-JUNE-2020
|| अजमेर || साहित्यकार व कवित्री सुमन शर्मा द्वारा पेश की गई कुछ कविताएं 


मैं स्त्री हूं समर्पण के लिए ही बनी हूँ


मैं अपनी आन रखती हूंँ, 
स्वाभिमान रखती हूंँ, 
पहचान खास रखती हूंँ,
बहते दरिया-सा उफान रखती हूंँ, 
यूं व्यस्त रहती हूंँ, 
हर पल मस्त रहती हूंँ, 
जीने का अंदाज खास रखती हूंँ। 
मैं अपने साथ गुलशन तमाम रखती हूंँ, 
मैं गीता-कुरान रखती हूंँ, 
आरती-अजान रखती हूंँ, 
गुरबत में शान रखती हूं, 
अपनों के लिए दुआएं तमाम रखती हूं। 
अमनोअमान रखती हूंँ, 
गीतों में जान रखती हूंँ, 
खुशियां तमाम रखती हूं, 
फर्ज पर कुर्बान जिस्मो-जान रखती हूंँ। 
सोचते हो जीत लोगे, 
या छल से मुझे पा जाओगे, 
तुम पुरुष हो,
पौरुष का दंभ रखते हो। 
वेदना में मैं पली हूं। 
दीपशिखा सी मैं जली हूंँ। 
कंटकों ने मुझको रचा है 
और मैं सुमन-सी खिलती रही हूंँ। 
मैं स्त्री हूंँ।
करोगे प्यार तो पा जाओगे।
रखोगे अधिकार तो छा जाओगे। 
मैं स्त्री हूंँ। 
समर्पण के लिए ही बनी हूंँ।
 सुमन शर्मा


२).
कुछ पल की मेहमान हूं मैं तो


मेरा अपना क्या है यहां पर, 
कुछ पल की मेहमान हूं मैं तो,
किसके लिए जुटाएं क्या-क्या,
बस एक सामान हूं मैं तो, 
कुछ सोये-सोये सपने हैं, 
लगते वे कुछ अपने-अपने हैं,
कौन यहां किसका अपना है, 
न तन अपना न प्राण हूं मैं तो,
क्या तेरा क्या मेरा है,
जीवन एक रैन बसेरा है, 
खोज रही हूं अपना साया, 
एक नश्वर संसार हूं मैं तो, 
जो खोया क्या उसकी चिंता, 
जो पाया क्या वो टिक पाया,
खोने-पाने की जद्दोजहद में, 
बस कोरा भ्रमजाल हूं मैं तो,
कितने ही कल बीत चुके हैं, 
उतरा हुआ खुमार हूं मैं तो। 


सुमन शर्मा



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