बच्चे और covid 19 लाॅकडाउन आठ वर्ष के बालक "अधीयांन" की नज़र में

||PAYAM E RAJASTHAN NEWS|| 20-APR-2020
|| अजमेर ||  बच्चे और covid 19 लाॅकडाउन आठ वर्ष के बालक "अधीयांन" की नज़र में 


बच्चों की दुनिया हमारी दुनिया से बहुत अलग होती है। उनके सवाल बहुत ही अलग और सोचो तो बहुत गहरे होते हैं। मयूर स्कूल में पढ़ने वाला एक 8 वर्षीय बालक इन दिनों जब अपने घर में है, तब उसे जिंदगी के दूसरे पहलू देखने को मिल रहे हैं। कोरोना का यह अजीब समय इस बच्चे के लिए अपने आप में एक पूरी शिक्षा बनकर आया है। छोटे से बच्चे ने उसके स्कूल का बंद होना, उसका खेल बंद होना, उसके दोस्तों से मिलना बंद होना, उसकी साइकिल चलाना बंद होना, सब एक साथ महसूस किया है और यह सिर्फ एक बच्चे की कहानी नहीं अपितु दुनिया के करोड़ों बच्चों की कहानी है। देश के प्रधानमंत्री जब सभी लोगों को अपने घर में ही रहने की सलाह देते हैं तब हर एक बच्चा भी प्रधानमंत्री को सुनता है। जब पुलिस अधिकारियों को सड़क पर लोगों के साथ संघर्ष करते हुए टीवी और न्यूज़ चैनलों पर देखता है तो यह बच्चा भी सवाल उठाता है कि मम्मी-पापा ये लोग मान क्यों नहीं रहे, सब बीमार हो जाएँगे ना.... कितने सारे लोग मर रहे हैं ना..... इटली, स्पेन और अमेरिका में। बच्चे को तब और भी आश्चर्य होता है जब 1 दिन टीवी पर चलती हुई खबर देखता है जिसमें डॉक्टरों को नर्सों को बीमार लोगों द्वारा परेशान किया जा रहा है और इस बात से एक 8 साल का बच्चा क्यों परेशान हो जाता है.... इसका जवाब हम सभी के पास है क्योंकि बच्चा हम सभी से ज्यादा संवेदनशील है उसके मन में सवाल होता है लेकिन उनके पास पूछने के लिए शब्द नहीं होते बस गुमसुम सा बैठकर अपने खिलौनों में खो जाता है और कभी मौका पाकर अकेले में पूछता है मम्मी डॉक्टर तो अपना काम ही कर रहे हैं ना..... वे मदद नहीं करेंगे तो सब मर जाएँगे। पुलिस भी तो हेल्प कर रही है ना.... क्या वे भी तो बीमार हो सकते हैं.... वे कोई आयरन मैन थोड़े ही हैं.... इनके पास तो स्पेशल सूट भी नहीं है... हे भगवान इन! सबकी रक्षा करना। माता-पिता ही यह कर सकते हैं कि वे अपने बच्चे के हृदय में उठते सैकड़ों सवालों के लिए मार्गदर्शन दें, जिससे वह बच्चा अपने जीवन में मदद करने वालों के महत्त्व को समझें। खुद को विश्व की मदद के लिए तैयार करे। मयूर स्कूल का यह छात्र अपने विद्यालय से यह सवाल पूछने की रचनात्मकता लेकर आया है। विद्यालय वह स्थान है जहाँ उसे सवाल पूछने की कला सिखाई जा रही है।
 जो कुछ अच्छा है उसकी सराहना करें और जहां उसे लगता है सवाल पूछने चाहिए वहां सवाल भी पूछे!
 हमारे लोकतंत्र की आवश्यकता ऐसे युवा है, जो रचनात्मक सवाल पूछ कर भविष्य में आने वाली ऐसी अनेकों विकट स्थितियों से सुरक्षित निकाल लेने की क्षमता रखते हो ।
 यह पहली बार नहीं कि आठ वर्ष के अधीयान ने ऐसा किया  वह इन दिनों इस महामारी के बारे में हर संभव जानने की कोशिश में है।
उसके सवालों के जवाब ढूंढने के दौरान उसको किसी रचनात्मकता से जोड़ना अधीयान के परिवार को ज़रूरी लगा इसलिए उसे देशभक्ति गीतों से, देश के इतिहास से, विभिन्नदेशों के बारे में तथा आरोग्य सेतु एप के विषय में,  प्रतिदिन अखबारों में आने वाली खबरों के विषय में, टेलीविजन में बताई जाने वाली कि कोविड-19 की  खबरों के विषय में जागरूक करना शुरु किया।
कभी वह कोई चित्र बनाता है, कभी किसी गाने का मतलब पूछता है और कभी जानना चाहता है कि ऐसा क्या पहले कभी हआ था.... संस्कृत और हिन्दी के गानों को याद करते हुए उनके शब्दों और भावों को अपने जीवन से जोड़ता है.....
कुल मिलाकर यह lockdown जहाँ इन बच्चों के लिए एक छोटी सी रुकावट है, वहीं एक सच्चे नागरिक से आने वाला समय  क्या आशा लगाए है यह बताने और जानने का भी।
ये समय निकाल जाएगा और बच्चों को बहुत कुछ सीख दे जाएगा.... शायद इन बच्चों के साथ-साथ हम बड़ों को भी।


अधीयान पारीक
आयु - 8 वर्ष
कक्षा - तीन (मयूर स्कूल, अजमेर)


पिता- डॉ. आशुतोष पारीक, सहायक आचार्य, संस्कृत विभाग, राजकीय महाविद्यालय, अजमेर


माता - तृप्ति पारीक


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